प्रतापगढ़ में बारिश की एक रात ने उजाड़ दिया पूरा परिवार: जर्जर मकान ढहने से छह लोगों की दर्दनाक मौत- पूरे शहर की आंखें हुईं नम

समर्पण न्यूज इंडिया
By - Samarpan News
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समर्पण न्यूज प्रतापगढ़ :-   शहर के महुली मोहल्ले में बुधवार देर रात हुई दर्दनाक घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया। बारिश के बीच करीब सौ वर्ष पुराना जर्जर मकान अचानक भरभराकर गिर पड़ा। हादसे के समय परिवार के अधिकांश सदस्य एक ही कमरे में सो रहे थे। देखते ही देखते पूरा मकान मलबे में तब्दील हो गया और उसके नीचे दबकर एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई। यह हादसा इतना भयावह था कि पूरे मोहल्ले में चीख-पुकार मच गई और रातोंरात खुशहाल परिवार उजड़ गया। बताया जा रहा है कि बारिश के कारण मौसम उमस भरा था, इसलिए घर के सभी सदस्य एसी चलने वाले कमरे में सो रहे थे। आधी रात के बाद अचानक तेज धमाके के साथ मकान ढह गया। किसी को संभलने या बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और बिना किसी इंतजार के मलबा हटाने में जुट गए। स्थानीय लोगों ने अपने हाथों से ईंटें और मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन हालात बेहद दर्दनाक थे। सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गया। जेसीबी और अन्य संसाधनों की मदद से कई घंटे तक राहत अभियान चलाया गया। मलबे से एक-एक कर शव निकाले जाते रहे और हर शव के बाहर आते ही वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। पूरे इलाके में मातम का माहौल छा गया। पुलिस के अनुसार हादसे में मकान मालिक प्रमोद श्रीवास्तव (60), उनकी पत्नी रीता श्रीवास्तव (55), छोटे बेटे नितिन श्रीवास्तव (25), बड़ी बहू माधुरी (23) तथा माधुरी के दो मासूम बेटे माधव (2 वर्ष) और अद्विक (10 माह) की मौत हो गई। परिवार का बड़ा बेटा अमन (28) इस हादसे में सुरक्षित बच गया। एक ही पल में माता-पिता, भाई, भाभी और दोनों भतीजों को खो देने के बाद उसका रो-रोकर बुरा हाल है। घटना की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया और पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। प्रारंभिक जांच में लगातार बारिश के कारण जर्जर मकान के कमजोर होकर ढहने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। महुली मोहल्ले के लोगों के लिए यह हादसा किसी सदमे से कम नहीं है। पड़ोसियों का कहना है कि श्रीवास्तव परिवार बेहद मिलनसार और खुशमिजाज था। घर में हमेशा बच्चों की किलकारियां गूंजती रहती थीं, लेकिन अब वहां सिर्फ सन्नाटा और मातम पसरा है। पूरे मोहल्ले में शोक का माहौल है और हर व्यक्ति इस त्रासदी को याद कर भावुक हो उठा है। यह हादसा जर्जर भवनों की अनदेखी पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुराने मकान की समय रहते मरम्मत या सुरक्षित व्यवस्था कर दी जाती, तो शायद छह अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। लगातार हो रही बारिश के बीच पुराने भवनों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों को गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। प्रतापगढ़ की यह मनहूस रात केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार के सपनों, रिश्तों और खुशियों के हमेशा के लिए बिखर जाने की ऐसी त्रासदी बन गई है, जिसने पूरे जिले को गहरे शोक में डुबो दिया है। अब हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समय रहते ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।

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