समर्पण न्यूज़ प्रतापगढ़ देशभर में आजादी, राष्ट्रभक्ति और तिरंगे के सम्मान का संदेश देने के लिए तिरंगा यात्राएं निकाली जा रही हैं। इसी क्रम में बुधवार को मांधाता ब्लॉक परिसर में भी ब्लॉक प्रमुख के नेतृत्व में तिरंगा यात्रा निकाली गई। लेकिन इसी दौरान ब्लॉक परिसर में क्षेत्र पंचायत निधि से करीब 8 लाख रुपये की लागत से लगाए गए तिरंगे को लेकर एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया, जो जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सीधे सवाल उठाता है। बताया जा रहा है कि ब्लॉक परिसर में लगभग दो माह पहले लगाया गया विशाल तिरंगा कुछ ही समय बाद क्षतिग्रस्त हो गया था। तिरंगा फटने की खबर सामने आने के बाद आनन-फानन में उसे उतार लिया गया। इसके बाद उम्मीद थी कि खराब तिरंगे को बदलकर नया तिरंगा लगाया जाएगा, लेकिन दो महीने का समय बीतने के बाद भी ब्लॉक परिसर में वह तिरंगा दोबारा नहीं लगाया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक ओर सरकारी स्तर पर ‘हर घर तिरंगा’ और तिरंगा यात्राओं के माध्यम से राष्ट्रध्वज के सम्मान का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जिस ब्लॉक परिसर में लाखों रुपये की लागत से तिरंगा लगाया गया था, वहां आज उसी तिरंगे का पता नहीं है। लाखों खर्च, फिर तिरंगा कहां गया? मामला केवल तिरंगा लगाए जाने या न लगाए जाने तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि क्षेत्र पंचायत निधि से लगभग 8 लाख रुपये खर्च करके तैयार किए गए इस तिरंगा प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति क्या है? यदि तिरंगा खराब हो गया था तो उसे हटाने के बाद नया तिरंगा लगाने में इतनी देरी क्यों हुई? क्या निर्माण या स्थापना से जुड़ी गुणवत्ता की जांच हुई? क्या संबंधित कार्यदायी संस्था से जवाब मांगा गया? क्या क्षतिग्रस्त तिरंगे को बदलने की जिम्मेदारी तय की गई? और सबसे अहम जिस काम पर जनता के पैसों से लाखों रुपये खर्च हुए, उसकी उपयोगिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? तिरंगा यात्रा निकल गई, लेकिन ब्लॉक का तिरंगा गायब- मांधाता ब्लॉक परिसर में बुधवार को तिरंगा यात्रा निकाली गई। हाथों में तिरंगा लेकर राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया गया और देशप्रेम के नारों से माहौल गूंजा। लेकिन इसी ब्लॉक परिसर में लगाया गया लाखों रुपये का विशाल तिरंगा अपनी जगह पर नजर नहीं आया। यह तस्वीर व्यवस्था के दोहरेपन पर सवाल खड़े करती है एक तरफ तिरंगे के सम्मान का संदेश देने के लिए यात्रा, दूसरी तरफ ब्लॉक परिसर में लाखों की लागत से लगाया गया तिरंगा ही गायब। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि तिरंगा क्षतिग्रस्त हुआ था तो उसे तत्काल बदलना चाहिए था। राष्ट्रध्वज से जुड़ी व्यवस्था में इतनी लंबी लापरवाही आखिर कैसे स्वीकार की जा सकती है? जांच हुई तो सामने आ सकता है पूरा हिसाब- अब जरूरत केवल तिरंगा दोबारा लगाने की नहीं, बल्कि पूरे प्रकरण की जांच कराने की है। क्षेत्र पंचायत निधि से खर्च हुई रकम, तिरंगा लगाने की प्रक्रिया, कार्य की स्वीकृति, भुगतान, कार्यदायी संस्था, सामग्री की गुणवत्ता और वर्तमान स्थिति इन सभी बिंदुओं की जांच होनी चाहिए। यदि लगभग 8 लाख रुपये वास्तव में इस कार्य पर खर्च किए गए हैं तो संबंधित अभिलेखों को सार्वजनिक कर यह बताया जाना चाहिए कि इतनी बड़ी रकम में आखिर क्या-क्या काम कराया गया और उसकी वर्तमान स्थिति क्या है। तिरंगा केवल लोहे का पोल और कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि देश की आन-बान और शान का प्रतीक है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि मांधाता ब्लॉक परिसर में लाखों रुपये खर्च करके लगाया गया तिरंगा आखिर दो महीने से कहां रखा है और उसे दोबारा लगाने में जिम्मेदारों के हाथ क्यों बंधे हुए हैं? अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले को महज एक तिरंगे का मामला मानकर नजरअंदाज करता है या फिर क्षेत्र पंचायत निधि से हुए खर्च और तिरंगा परियोजना की पूरी पड़ताल कर जिम्मेदारी तय करता है। सवाल सीधा है तिरंगा यात्रा के लिए जोश है, तो ब्लॉक परिसर में लाखों रुपये से लगाया गया तिरंगा दोबारा लगाने की जिम्मेदारी कब निभाई जाएगी?
तिरंगा यात्रा के बीच मांधाता ब्लॉक में तिरंगे पर सवाल: करीब 8 लाख की लागत से लगा ध्वज दो महीने से गायब, जिम्मेदारों पर उठे गंभीर सवाल
By - Samarpan News
August 12, 2026
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