प्रयागराज। किन्नर समाज को सामाजिक सम्मान, शिक्षा, रोजगार और मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से आगामी नवंबर माह में छत्तीसगढ़ स्थित राम मिलेंगे आश्रम में पांच दिवसीय राष्ट्रीय किन्नर उत्थान महाकुंभ एवं संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इस महत्त्वपूर्ण आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से किन्नर संत, अखाड़ों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, धर्माचार्य, शोधकर्ता और समाजसेवी बड़ी संख्या में भाग लेंगे। आयोजन का उद्देश्य किन्नर समाज के समग्र विकास के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सार्थक संवाद स्थापित करना तथा सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देना है।
इस आयोजन की रूपरेखा प्रयागराज में सनातनी किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्यानंद गिरि (टीना मां) और प्रसिद्ध कथावाचक एवं प्रेरक डॉ. अशोक हरिवंश के बीच हुई मुलाकात के दौरान तैयार की गई। सिविल लाइंस स्थित आवास पर हुई इस बैठक में किन्नर समाज के सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और आर्थिक उत्थान से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए तथा किन्नर समाज को भी विकास की मुख्यधारा में सशक्त रूप से जोड़ा जाना समय की आवश्यकता है।
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्यानंद गिरि ने कहा कि किन्नर समाज सदियों से सामाजिक उपेक्षा और अनेक चुनौतियों का सामना करता आया है, लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा किन्नर समाज के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ समाज के लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक सोच विकसित होने के कारण अब किन्नर समुदाय को पहले की अपेक्षा अधिक सम्मान और पहचान मिल रही है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किन्नर समाज को सम्मान देने तथा विभिन्न स्तरों पर उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने के प्रयासों ने समाज में नई ऊर्जा का संचार किया है। सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ने से किन्नर समुदाय के लोगों में आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है और वे शिक्षा, सेवा, धर्म तथा सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।
महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्यानंद गिरि ने बताया कि नवंबर में आयोजित होने वाले पांच दिवसीय महाकुंभ में देशभर से आने वाले किन्नर संतों और प्रतिनिधियों के बीच विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। संगोष्ठी में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वरोजगार, सामाजिक अधिकार, धार्मिक सहभागिता, महिला एवं बाल कल्याण, आत्मनिर्भरता तथा सामाजिक समावेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों में किन्नर समाज द्वारा किए जा रहे सकारात्मक कार्यों और सफल प्रयासों को भी साझा किया जाएगा, ताकि अन्य क्षेत्रों में भी उन्हें अपनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान समाज के युवाओं को शिक्षा के प्रति जागरूक करने, कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ने और स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही यह संदेश भी दिया जाएगा कि किन्नर समाज केवल पारंपरिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक सेवा, कला, संस्कृति और उद्यमिता जैसे अनेक क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकता है।
प्रसिद्ध कथावाचक एवं प्रेरक डॉ. अशोक हरिवंश ने कहा कि भारत की संस्कृति समावेशी रही है और प्रत्येक व्यक्ति को समान सम्मान देने की परंपरा हमारी पहचान है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में समाज तेजी से परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है, इसलिए आवश्यक है कि किन्नर समाज को भी समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि शिक्षा और जागरूकता किसी भी समाज के विकास की सबसे बड़ी कुंजी है, इसलिए किन्नर समाज को शिक्षा और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाना चाहिए।
डॉ. अशोक हरिवंश ने कहा कि प्रस्तावित राष्ट्रीय संगोष्ठी केवल एक धार्मिक या सामाजिक आयोजन नहीं होगी, बल्कि यह समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनेगी। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे तथा ऐसे सुझाव प्रस्तुत करेंगे, जिनसे किन्नर समाज को सरकारी योजनाओं, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सके।
उन्होंने बताया कि महाकुंभ में देशभर से आने वाले प्रतिनिधियों के बीच संवाद, विचार-विमर्श और अनुभवों के आदान-प्रदान के माध्यम से भविष्य की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। साथ ही सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के सहयोग से किन्नर समाज के लिए दीर्घकालिक विकास की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएंगे।
आयोजन समिति के अनुसार पांच दिवसीय इस महाकुंभ में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ प्रेरक व्याख्यान, सामाजिक संगोष्ठियां, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, सम्मान समारोह और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। विभिन्न राज्यों से आने वाले प्रतिभागी अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे सामाजिक कार्यों की जानकारी साझा करेंगे, जिससे बेहतर कार्यप्रणालियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
आयोजकों का मानना है कि इस राष्ट्रीय आयोजन से समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और किन्नर समुदाय के प्रति लोगों की सोच में और अधिक सकारात्मक बदलाव आएगा। साथ ही किन्नर समाज को आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता की दिशा में आगे बढ़ने का नया अवसर मिलेगा।
महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्यानंद गिरि ने सभी सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों, धर्माचार्यों और समाजसेवियों से इस महत्त्वपूर्ण आयोजन में सहभागिता करने की अपील करते हुए कहा कि जब समाज का प्रत्येक वर्ग एक-दूसरे के साथ खड़ा होगा, तभी समावेशी और सशक्त भारत का निर्माण संभव होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नवंबर में आयोजित होने वाला राष्ट्रीय किन्नर उत्थान महाकुंभ समाज में समानता, सम्मान और सामाजिक एकता का नया संदेश देने के साथ-साथ किन्नर समाज के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित होगा।